दान का बदलता स्वरूप

 

दान भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। दधिचि ऋषि एवं कर्ण जैसे अन्य कई महापुरुषों के दान की गाथायें हमारे शास्त्रों में मिलती हैं। किन्तु इनको स्वार्थवश याचना अथवा परीक्षा के सफल प्रयास कहना अधिक उचित होगा। वेदों व पुराणों में भी दान का महत्व बताया गया है। विशेषकर ब्राह्मणों को दिये गये दान को विशेष पुण्य का दर्जा दिया गया है। यह शायद उस समय की सामाजिक परिस्थिति के चलते उचित रहा हो। उस समय ब्राह्मण विद्यार्थियों को अपने आश्रम में रख कर शिक्षा देते थे, अथवा ज्ञान की खोज में अपना पूरा जीवन लगा देते थे। यह एक प्रकार से सामाजिक उत्थान को प्रोत्साहित करने का प्रयास था। निर्धन व जरूरतमन्द लोगों सहायता दया से प्रेरित थी। इस प्रकार ये दान बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के किये जाते थे, जो वास्तव में मन में एक आनन्द का आभास पैदा कर एक प्रकार से पुण्यफल देते थे।

समय के साथ मनुष्यों में लालच का उद्भव हुआ, परिणाम स्वरूप संग्रह की प्रवृत्ति बढ़ने लगी। फलतः दान को स्वर्ग प्राप्ति व पाप को नष्ट करने का उपाय प्रचारित किया जाने लगा। इसके चलते दान दाताओं व दान ग्रहण कर्ताओं का तेजी से विस्तार हुआ। साधारण जन जहाँ मुठ्ठी भर अनाज अथवा कुछ पैसे दान कर स्वर्ग में अपना स्थान सुनिश्चित मानने लगे, वहीं व्यवसायी व लाभप्रद नौकरी पेशा लोग दान देकर अपने पाप का बोझ हल्का करने के प्रयास में जुट गये। इस प्रकार स्वार्थ साधन के लिये दान की परिपाटी का आरम्भ हुआ।

दान करने वालों की बढ़ती संख्या के चलते दान पाने की लालसा बढ़ती गयी। दान पाने के लालच में  निर्धन लोगों में भीख माँगने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया। यहाँ तक बच्चों का अपहरण कर उन्हें अपाहिज कर भीख मँगवाने जैसे जघन्य अपराध भी होने लगे। ब्राह्मणों ने दान संग्रहण के लिये कई नये तरीके इज़ाद करना शुरू कर दिये। इनमें पूजा, पाठ, जप आदि के द्वारा परिवार की खुशहाली का भरोसा, स्नान के बाद तिलक लगाकर आशीर्वाद देना, अलग अलग देवी देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित कर उनको चमत्कारिक बतलाकर दर्शनार्थी आकर्षित करना प्रमुख थे। चंदा एकत्रित कर बड़े बड़े धार्मिक आयोजनों को भी इसी श्रेणी में रखा जा सकता है। यह एक प्रकार से मानसिक व सामाजिक दबाव बना कर दान लेने के समान माना जा सकता है।

स्वतन्त्र भारत में सरकारी दान की कई प्रकार की नयी विधायें निकली। इसमें किसानों की ऋण माँफी, दुर्घटनाओं में पीड़ित परिवारों को राहत राशि प्रमुख हैं। वैसे आरक्षण को भी इसी श्रेणी में रखा जा सकता है, विशेषकर उस समय जब यह लाभ बार बार एक ही परिवार वाले लेने लगे। अच्छे इरादे से शुरू की गई ये योजनायें राजनीति के चलते सरकार की सहृदयता की जगह प्राप्त करता का अधिकार अथवा चुनावी रणनीति का हिस्सा कब बन गई पता ही नहीं चला। इन योजनाओं से लाभ कम समाज का नुकसान अधिक हुआ है। सामाजिक विघटन, गुणता में गिरावट, अकर्मण्यता तथा हर समस्या के लिये सरकार की ओर देखना इन्हीं योजनाओं की देन है। अच्छा होता यदि इन योजनाओं को योग्यता से जोड़ा जाता।

 

समय के साथ कई धन कुबेरों ने अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा समाज के उत्थान के लिये देने की प्रथा आरम्भ की। हाँलाकि यह दान उनके द्वारा स्थापित संस्थानों की ओर से किया जाता है किन्तु समाचारों में नाम प्रायः धन कुबेरों का ही आता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इसका पिछड़ो के विकास में एवं साथ ही दानदाता की समाज में प्रतिष्ठा स्थापित करने में बहुत बड़ा योगदान है। इसी श्रंखला में ऐसे कई सीमित साधन वाले गुमनाम दानदाता भी आते हैं जो अपनी लगभग पूरी कमाई व समय निर्धन एवं बेसहारा लोगों की सेवा में लगा देते हैं, ऐसे लोग सिर्फ सेवाभाव से प्रेरित होते है।

आजकल कार्पोरेशन द्वारा सामाजिक जिम्मेदारी के निर्वाह का काफी प्रचलन है। सरकारी संस्थानों के लिये सरकार द्वारा आवश्यक बनाया गये इस नियम का कई निजी संस्थान भी पालन करते हैं। यह जनता में संस्थान की छबि निखारने के लिये किया गया दान है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इसके चलते कई गाँवों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

क्षेत्रीय विकास के लिये जन प्रतिनिधियों को क्षेत्र के आकार के अनुसार लाखों करोड़ों रुपये अनुदान दिया जाना सरकारी दान का नवीनतम रूप है। यह दुर्भाग्य है कि जन प्रतिनिधियों की उदासीनता तथा गलत प्राथमिकता के चलते इसका सही लाभ संबन्धित क्षेत्र को नहीं मिल पाता है।

चिकित्सा क्षेत्र में विकास के साथ एक नये प्रकार के दान की परंपरा आरम्भ हुई यथा रक्त दान, कोख दान एवं किडनी दान आदि। जन सेवा के रूप में शुरू हुए इस दान ने कब व्यवसाय का रूप ले लिया पता नहीं चला। मरणोंपरान्त अंगदान व देहदान अवश्य ही निस्वार्थ दान है।

दान छोटा या बड़ा यथार्थ में बिना किसी फल के स्वेच्छा से सुपात्र को किया दान ही श्रेष्ठ माना जायेगा।

 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *