क्या ये विकास है?

 

अर्थ शास्त्रियों ने पूरी मानव आबादी को तीन भागों में बाँट रखा है। ये भाग हैं विकसित, विकासशील व अविकसित। इस विभाजन का आधार रखा गया है प्रतिव्यक्तति आय, आधुनिक शिक्षा का प्रसार, क्रय शक्ति व सेहत। विकसित देशों के अर्थ शास्त्रियों द्वारा निर्धारित इस विभाजन को लगभग पूरे विश्व ने स्वीकार कर लिया है।

किन्तु क्या यह विभाजन सही है? क्या अन्य कोई और किसी क्षेत्र की संपत्ति नापने का आधार नहीं हो सकता है? क्या इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत नहीं है? इन सब प्रश्नों के उत्तर हमें मिल सकते है, यदि हम वास्तविक संपदा को समझने का प्रयास करें।

मनुष्य अपनी जरूरत की वस्तुओं को प्रकृति से प्राप्त करता है। हवा, पानी, धूप, खनिज व भोजन आदि हमें प्रकृति से ही मिलता है। लगभग सभी ओद्योगिक उत्पाद भी प्रकृति से प्राप्त खनिज अथवा प्रकृतिक उत्पादों से ही बनते हैं। अतः यह आवश्यक है कि संपदा का मापदंड भी यही होना चाहिये।

बहुत पहले एक वैज्ञानिक लेख में विकास का मापदंड उस देश में प्रति व्यक्ति कितने एकड़ पृथ्वी के उत्पाद का उपयोग होता है बताया गया था।

पृथ्वी पर 2012 की रिपोर्ट के अनुसार कुल 11.8 बिलियन हेक्टेयर उत्पादक क्षेत्र के हिसाब से प्रति व्यक्ति 1.8 हेक्टेयर उपलब्ध क्षेत्र है। अतः प्रति व्यक्ति इतने क्षेत्रफल का उत्पाद हर व्यक्ति को मिलना चाहिये। इसकि तुलना में नीचे तालिका में कुछ देशों के प्रतिव्यक्ति उपलब्ध क्षेत्रफल व प्रतिव्यक्ति क्षेत्रफल उत्पाद का उपयोग की जानकारी दी गई है। तालिका से स्पष्ट है कि अधिकतर विकसित व विकासशील देश अविकसित देशों के प्राकृतिक साधनों का दोहन कर रहे हैं।

यह दुर्भाग्य है कि आधुनिक औद्योगिकरण के कारण प्राकृतिक उत्पादों की तुलना में औद्योगिक उत्पादों की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। यह भी आश्चर्य की बात है कि गुणता व उत्पादकता में सुधार के नाम पर विकसित मशीनों ने औद्योगिक उत्पादों की कीमतों की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अतिरिक्त औद्योगिक क्षेत्र में में अनेक उत्पाद ऐसे बनाये जाते हैं जो मानव हितों के विरुद्ध जाते हैं।

 

 

क्रमांक देश प्रतिव्यक्ति हेक्टेयर  क्षेत्रफल उत्पाद का उपयोग प्रति व्यक्ति प्राकृतिक साधन उपलब्धता
1 अमेरिका 8.22 3.76
2 रूस 5.59 6.79
3 फ्रान्स 5.14 3.11
4 चीन 3.38 0.94
5 भारत 1.15 0.45
6 मध्य अफ्रिकन रिपब्लिक 1.24 7.87
7 कांगो 1.29 10.91
8 अर्जेनटिना 3.14 6.94
9 पेरागुवे 4.16 10. 52

 

औद्योगिकरण से सर्वाधिक नुकसान मानव हितों का निम्न क्षेत्रो में हुआ है –

  • विनाश कारी हथियार- न्यूक्लियर बम, रसायनिक शस्त्र व उनके दूर तक मारक क्षमता के साधन, स्वचालित व शक्तिशाली हथियार। इस कारण कई देशों को अपने नागरिकों के उत्थान के बदले सीमा सुरक्षा पर अधिक  साधन खर्च करना पढ़ता है। आतंकवाद फैलने में भी हथियारों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • नशीले पदार्थ- लगभग सभी देशों में प्रतिबन्ध के बावजूद नशीले पदार्थों का धंधा पूरे विश्व में फैला हुआ है। एक ओर इसके कारण जहाँ कई युवा जिन्दगियाँ बर्बाद हो रही है वहीं इससे अर्जित धन आतंकियों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
  • पर्ययावरण की बर्बादी- यातायात साधनों जनित वायु प्रदूषण, औद्योगिक अपशिष्ट द्वारा जल व वायु प्रदूषण, ओजोन सतह की क्षति तथा हानिकारक रसायनों का उपयोग के कारण पूरा विश्व आज मानव जाति के भविष्य के लिये चिन्तित है।

तथाकथित विकास के नाम पर मनुष्य आज जिस डाल पर बैठा है उसी को काटने में लगा है।

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