मन क्या है?

 

हम प्रायः लोगों को कहते हुए सुनते है कि आज पकोड़े खाने का मन है अथवा पिकनिक पर जाने का मन है। कई बार लोग कहते हैं कि कुछ करने का दिल नहीं है या किसी भी चीज में मन नहीं लग रहा है। कभी सुनने को मिलता है कि मन उदास है या दिल खुश हो गया। लोग यह भी कहते हैं कि मन को बस में रखना चाहिये।

दिल और मन का संबंन्ध क्या है? दिल का कार्य तो शरीर में रक्त का संचालन करना भर है तथा मन नाम का तो शरीर का कोई भाग नहीं होता है। शरीर विज्ञान के अनुसार तो सुख, दुःख अथवा इच्छा का नियंत्रण मस्तिष्क ही करता है। फिर मन की उत्पत्ति कैसे हुई?

यह वैज्ञानिक तथ्य है कि मानव मस्तिष्क का हाईपोथाल्मस  भाग जो त्वरित (इन्सटिंकिटिव) व्यवहार को प्रभावित करता है तथा एमिग्डाला जो भावों व चिंताओं को प्रभावित करता है। मस्तिष्क के लिम्बिक सिस्टम  में स्थित खुशी केन्द्र (प्लेजर सेन्टर) भावों को व्यक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये खुशी केन्द्र एक प्रकार से मस्तिष्क के लिये पुरस्कार सिस्टम डोपेमाइन सिस्टम के भाग हैं। इसे ग्लोबलाइजेशन कहते है। सीखने की प्रक्रिया में कई न्यूरानस लम्बे समय के लिये आपस में जुड़ जाते हैं। इसी तरह लम्बे समय का दुःख (डिप्रेशन) इन न्यूरान्स को अलग कर देता है जो चीजों को भूलने मे मदद करता है। मस्तिष्क में नयी चीजों को याद रखने की जगह बनाना जरूरी है, इसके लिये भूलना आवश्यक है। डोपेमाइन जहाँ उकसाता है आक्सीटोसिन चित्त शान्त करता है, मन में कोमल भावनायें पैदा करता है व विश्वास पैदा करता है। आक्सीटोसिन भावनात्मक संबंन्धों (जैसे माँ का बच्चों को दूध पिलाना) के समय उत्पन्न होता है। यह भूलने में मददगार होता है।

हमारे मस्तिष्क में एक साथ हजारों गतिविधियां चलती रहती हैं। इन्हें रोकने के लिये एक तन्त्र जरूरी है जिससे हम अपने दिमाग पर नियंत्रण रख सकें। बिना नियंत्रण के हम पागल हो जायेंगे। हमारे मस्तिष्क का एक बढ़ा भाग गतिविधियों को रोकने का काम करता है। यदि ऐसा नहीं हो तो अनावश्यक प्रवृत्तियाँ व आवेग पूरी तरह से हम पर हावी हो जायेंगें व सामाजिक व पारिवारिक संबंधो को तहसनहस कर देंगें।

शायद इसी नियत्रण तन्त्र को हम लोग मन या दिल के नाम से जानते हैं।

विचारणीय ये है कि नियन्त्रण तन्त्र विकसित कैसे होता है?

बचपन से लेकर पूरी उम्र हमें अपने परिवेश से अपने व अन्य  व्ययक्तियों से संबन्धी प्रतिक्रियायें मिलती रहती हैं। इनमें प्रशंसा, बुराई, वर्जना, प्रोत्साहन, अपमान, गुस्सा, प्रेम, घृणा आदि सम्मलित हैं। इन प्रतिक्रियाओं को हर व्यक्ति अपने स्वभाव के अनुरूप ग्रहण करता है। इसको हम साधारण शब्दों में अनुभव भी कह सकते हैं। ये अनुभव ही व्यक्ति के नियंत्रण तन्त्र को दिशा देते है। जिसे हम मन कह सकते हैं।

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