विश्व सरकार

आज पूरी दुनिया में आतंकवाद, आन्तरिक मतभेद, अपराधों की बहुलता व धार्मिक प्रतिद्वन्दिता का माहौल है। अपने आर्थिक, भोगोलिक व अन्य स्वार्थों के चलते कई देशों की सरकारें प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप में अन्य देशों में अशान्ति का वातावरण पैदा करने का प्रयास करती रहती हैं। एक देश के अपराधी दूसरे देश में शरण लेकर देश के कानून से बचे रह कर अपराधों का संचालन खुले रूप से करते हैं। विभिन्न देशों के अलग अलग कानूनों का ऐसे अपराधी भरपूर लाभ उठाते हैं।
पूरे विश्व में राजनीतिज्ञ इन समस्याओं से निपटने के प्रयास अपने अपने तरीके से कर रहे हैं किन्तु अपराध हैं कि बढ़ते ही जा रहे है। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो लगभग सभी देश इन समस्याओं से ग्रस्त हैं। अतः आवश्यक है कि सभी देश मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें।
समस्या का समाधान निकालने से पहले इन समस्याओं के कारण ढूँढना आवश्यक है। यूँ तो सामाजिक विचारक कई कारण बतलाते रहतें हैं। लेकिन ये कारण या तो एक क्षेत्र विशेष के लिये लागू होते है अथवा एक संकीर्ण दृष्टि से विश्लेषित सोच की उपज है। यदि हम समूचे मानव समाज की दृष्टि से वृहत विश्लेषण करें तो आज की समस्याओं के मूल में इन कारणों को पायेगें –
1. विध्वंसकारी हथियारों की उपस्थिति से कई क्षेत्रों में भय का वातावरण। कुछ देशों ने वैज्ञानिक व धन बल से संहारक हथियारों का आविष्कार कर उत्पादन करना शुरु किया। इनको शक्ति का प्रतीक बनाकर दूसरे देशों या विरोधी तत्वों को बेच कर अधिक धन अर्जित करने का साधन बनाया। परिमाम स्वरूप कई देश गलत तरीकों से धन अर्जित करने वालों को प्रोत्साहन देकर ये साधन जुटाकर शक्ति बढ़ाने लगे। बढ़ती शक्ति के कारण उपजित अंहकार ने विवादों को बढ़ाया।
2. हथियारों की आसान उपलब्धता ने अपराधियों की ताकत में कई गुना इजाफा किया इस कारण सरकार व अपराधियों में प्रतिद्वन्दिता को बढ़ाया।
3. धार्मिक अनुनायियों की संख्या को वर्चस्व का प्रतीक मानकर भय, लालच व जबरन धर्म परिवर्तन ने एक नयी सामाजिक प्रतिद्वन्दिता को जन्म दिया जिसने आज उन्माद का रूप ले लिया।
4. प्राकृतिक साधनों को सीमित मान कर ताकतवर देशों की विश्व के साधनों को अपने नियन्त्रण में लेने की प्रतिस्पर्धा ने भी विवादों को विश्वव्यापी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उपरोक्त कारणों के मद्देनजर यदि हम आज की समस्याओं को देखें तो किसी एक देश के लिये अकेले इन समस्याओं से लड़ना संभव नहीं है। सभी देश मिलकर ही इन समस्याओं से मानव समाज को मुक्त कर सकते है। अतः आवश्यकता है कि सभी तरह की राजनीतिक व भौगोलिक
सीमाओं को तोड़ कर पूरे विश्व में एक सरकार स्थापित कर दी जाये। यह इस प्रकार संभव हो सकता है –
1. संयुक्त राष्ट्रसंघ पहले से ही एक ऐसी संस्था है जिसको विश्व सरकार में परिवर्तित किया सकता है। जरूरत सिर्फ सभी के अधिकार बराबर करने की है। शेष देशों को सदस्यता के लिये आमन्त्रित किया जा सकता है।
2. विश्व सरकार के लिये संविधान कुछ प्रजातन्त्रिय देशों के संविधानों से उपयुक्त अंशों को लेकर आसानी से वनाया जा सकता है। यह सभी पर एक जैसा लागू होगा। आज कल यातायात व संचार माध्यमों से पूरे विश्व में एक सरकार चलाना आसानी से संभव है।

मानव समस्याओं को कम करने के लिये संविधान में निम्न पहलुओं को सम्मलित करना जरूरी है –
1. साधारण हथियारों जैसे बन्दूक (स्वचालित नहीं) व पिस्तौल को छोड़ कर अन्य हथियारों का उत्पादन तुरन्त बन्द कर इन उद्योगों का उपयोग आवश्यक वस्तुओं के निर्माण के लिये किया जाये। वर्तमान हथियारों को शीघ्र नष्ट किया जाये। सीमायें समाप्त हो जाने से इन हथियारों की प्रासंगिकता समाप्त हो जायेगी।
2. प्राकृतिक साधन जहाँ हैं वहाँ रहने वालों की संपत्ति होगें। वहाँ रहने वाले लोग ही उनका विक्रय सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर कर सकेगें।
3. न्यूनतम व अधिकतम आय का अन्तर 10 गुना से अधिक नहीं होगा। इससे अधिक आय पर सरकार का अधिकार होगा। यह आर्थिक विषमता को समाप्त कर सामाजिक सामन्जस्य बढ़ाने के लिये जरूरी है।
4. पूरे विश्व में एक जैसा पाठ्यक्रम होगा, भाषा का माध्यम क्षेत्रानुसार अलग हो सकता है लेकिन एक विश्व भाषा चुनकर सबको जरूर सिखाई जाये। अधिकृत शिक्षण संस्थाओं के अतिरिक्त सभी प्रकार की कोचिंग प्रतिबंधित की जाये।
5. किसीको भी मुफ्त में कुछ नहीं दिया जाये। निशक्तों व दिव्यागों से यथा संभव काम लेकर पारिश्रमिक अक्षमता के अनुपात में अधिक दिया जाये। इससे उनके आत्म सम्मान में वृद्धि होगी।
6. लोगों को अपनी आस्था के अनुसार धर्म पालन करने की स्वतन्त्रता हो। स्कूलों में सभी धर्मों को पढ़ाई में शामिल किया जाये जिससे अपनी आस्था के अनुसार युवा अपना धर्म चुन सकें। किसी भी प्रकार के प्रलोभन देकर, भय से व उकसाकर धर्म परिवर्तन करवाना दंडनीय अपराध हो।
7. सार्वजनिक रूप से किसी की निन्दा करना व अपशब्द कहना दंडनीय अपराध हो।
8. धार्मिक स्थलों की आय पर सरकार का अधिकार हो। रखरखाव व प्रबंधन कर्मचारियों का वेतन तय मानकों से सरकार दे।
9. समाज के लिये हानिकारक विषय वस्तु जैसे दुर्भावना फैलाने वाले भाषण, उत्तेजक चित्र व लेख आदि वेब साइट पर डालना दंडनीय अपराध हो।
इस विश्व सरकार से निम्न लिखित लाभ तो अवश्य ही अपेक्षित हैं –
1. देशों की सीमायें समाप्त हो जाने से सीमा शुल्क (कस्टम) व आव्रजन (माइग्रेशन) की आवश्यकता समाप्त हो जायेगी जिससे समय व मानव श्रम की बचत होगी।
2. एक संविधान, एक विश्व (कामन) भाषा व एक जैसी शिक्षा होने से सभी सामाजिक श्रेणियों के लोगों का आपसी मेलजोल बढ़ेगा। वैश्विक स्तर पर सामाजिक उन्नति की प्रबल संभावना।
3. बिना रोक टोक अथवा बिना सीमा शुल्क के व्यापार से कीमतों में कमी एवं उपलब्धता में सुधार अपेक्षित।
4. सीमाओं के हट जाने से सीमा सुरक्षा खर्च की बचत का उपयोग लोक कल्याण में किया जाना संभावित।
5. आर्थिक असमानता कम होने से समाज में संतोष में बढ़ोतरी व अपराधों में कमी अपेक्षित।
विश्व सरकार गठन में विभिन्न देशों, विशेष रूप शक्ति संपन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षौ का अहम् बाधक हो सकता है। पूरे विश्व की भलाई के लिये यदि ये अहम् से उपर उठ कर सभी इस दिशा में पहल करें तो हमारे ऋषि मुनियों का वसुधैव कुटुम्बकम का सपना साकार हो सकता है।

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