नयी पीढ़ी

 

हमेशा से ही बुजुर्गों का यह मानना रहा है कि उनका बचपन अथवा युवावस्था का समय आज की अपेक्षा अधिक अच्छा था। अधिकतर लोग यह मानते हैं कि आज की पीढ़ी आलसी, निरंकुश व संस्कारहीन है। किन्तु यह मूल्यांकन पुराने मानकों पर आधारित है। अपने ३० वर्ष के कार्यकाल, ५ वर्ष तकनीकि कालेजों में अध्यापन काल व सामाजिक एवं पारिवारिक संपर्को के चलते मैंने दो या तीन नयी पीढ़ियों को काफी निकट से समझने का प्रयास किया है। इस अनुभव के आधार पर मैंने इनमें ये विशेषतायें पायीं है:-

१. बुद्धिमान

हर नयी पीढ़ी में बौद्धिक विकास बढ़ता जा रहा है। सीखने की क्षमता में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। तर्क शक्ति बढ़ रही है। इसका प्रमाण जन्म से ही देखने को मिल जाता है। जहाँ पहले नवजात शिशु दो हफ्ते तक आँख भी नहीं खोल पाते थे, आजकल बच्चे पहले दिन से ही नजरें घुमाकर वातावरण का जायजा लेने लगते हैं। दो तीन दिन में तो वे सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों को पहचानने लगते हैं।

२. जिज्ञासु

जानने व समझने की पृवत्ति हर पीढ़ी के साथ बढ़ रही है। आजकल की पीढ़ी आधुनिक व सूचना प्राद्योगिक उपकरणों का उपयोग बचपन से ही सहज रूप से कर पहले की अपेक्षा अधिक जानकारी रखती है। उपलब्ध जानकारी का उपयोग वह अच्छी तरह करना भी जानती है। उनका सामान्य ज्ञान ४० वर्ष पूर्व हम उम्र बच्चों की तुलना में कई गुना अधिक है।

३. आत्मविश्वास

नयी पीढ़ी के आत्मविश्वास उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। आज के बच्चे व युवा आसानी से हार स्वीकार नहीं करते। ऐसा कोई काम नहीं जिसके लिये वे कौशिश न करें। उनमें अजनबी से बात करने में न कोई झिझक दिखती है ना ही मंच पर प्रदर्शन का कोई भय। आजकल के बच्चों को चुनौतियाँ पसंद हैं तथा वे जोखिम उठाने के लिये तत्पर रहते हैं।

४. स्वतन्त्र विचार क्षमता

युवा पीढ़ी में अपनी स्वयं की परख क्षमता है। जिससे वे स्वयं अपने लिये अच्छे बुरे का निर्णय लेने में सक्षम हैं। प्रायः उनके निर्णय सही पाये गये हैं। इसके बावजूद वे अनुभवों का आदर करते हैं व जरूरत महसूस होने बड़ो की सलाह लेने में संकोच नहीं करते। हाँलाकि अंतिम निर्णय उनका स्वयं का ही होता है।

५. जीने की कला

नयी पीढ़ी जीवन के हर पल को जीना अधिक अच्छी तरह से जानती है। कोई भी उत्सव व आयोजन हो उसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। गरबा, गणेशोत्सव व दुर्गा पूजन का विस्तार इसका प्रमाण है। पर्यटन में भी युवा वर्ग का बाहुल्य आसानी से देखा जा सकता है।

६. सतत सुधार का प्रयास

नयी पीड़ी हर क्षेत्र में लगातार नये आयाम स्थापित करने में लगी है। गाने का मंच हो या नाच का छोटे छोटे बच्चों के अनूठे अंदाज हैरत में डाल देतें हैं। प्रतिभा खोज के मंच पर कई प्रदर्शन तो असंभव से ही लगते हैं। सतत सुधार व चुनौतियों से जूझना नयी पीढ़ी का स्वभाव बन गया है।

७. प्राथमिकता साफ

नयी पीढ़ी अपनी प्राथमिकता के बारे में अधिकतर दुविधा में नहीं रहती है। वह अच्छी तरह से जानती है कि उन्हें कहाँ जाना है और क्या प्राप्त करना है। किसी की सलाह या दबाव उन्हें अपने मार्ग से नहीं डिगा सकता है।

८. संवाद कुशलता

नयी पीढ़ी प्रायः किसी भी व्यक्ति के सामने अपनी बात सहज व सीधे से रख सकती है। संवाद की यह कुशलता उन्हें जीवन में सामाजिक, व्यवहारिक व कार्य क्षेत्र में सफल होने में बहुत मददगार होती है।

९. उर्जा

नयी पीढ़ी में उर्जा की उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। आज के बच्चे व युवा थकना तो जैसे जानते ही नहीं। सवेरे से देर रात तक उन्हें व्यस्त देखा जा सकता है।

ये ही गुण हैं जो भविष्य के प्रति मानव आशाओं को जीवित रखे हुए हैं। आवश्यकता सिर्फ यह है कि वे अपने मार्ग से न भटकें।

 

 

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